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सत्य की खोज में

Posted On: 25 Dec, 2010 में

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चरों ओर  पथ अनेक

पर मैं डिगा नहीं

एक ओर चल पड़ा

सत्य की खोज में

अमृत सा जीवन मेरा

पल पल सुख का संग

सभी कुछ भुला दिया

सत्य की खोज में

डगर डगर ,गली गली

सत्य के प्रकार नए

आश्चर्य से भर गया

सत्य की खोज में

शहर गावं गली क्या

घर, घर अंधकार

देखा ऐसा द्रश्य मैंने

सत्य की खोज में

कोई भी छूटा नहीं

सत्य के ढोंग से

हर कहीं विफल रहा

सत्य की खोज में

जितने थे उजले तन

उनमें पाया केवल भ्रम

सत्य कहीं मिला नहीं

सत्य की खोज में

संग हर आस के

भटक कर थक गया

तिल तिल मारा मैं

सत्य की खोज में…………………..

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

razia mirza के द्वारा
January 14, 2011

सुन्दर रचना| सत्य के नाम

Amit Dehati के द्वारा
December 31, 2010

बहुत ही खुबसूरत , अच्छा लगा हार्दिक बधाई ! http://amitdehati.jagranjunction.com

abodhbaalak के द्वारा
December 28, 2010

साब जी, रौशनी जी के ब्लॉग पर आपके कमेन्ट के बाद सोचा देखूं की आप भी किस तरह के लेखक है और कैसा लिखते हैं. पर अफ़सोस आप भी हम सब की श्रेरनी में ही आते हैं, अफ़सोस http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    danishmasood के द्वारा
    December 28, 2010

    धन्यवाद् आप ने हमें अपने मायर का तो समझा वैसे आप क्या इस ब्लॉग में मालिक मोहम्मद जाइसी को ढूंढ रहे हैं शायरी खून के आंसू रुलाती है ये गदये नहीं पदये है दोस्त और अगर आप को ज्ञात हो तो इल्हाम भी कोई चीज़ होती है…….एक शेर आप की नजर. राज़ जो सीनय फितरत में नेहाँ होता है ….. सब से पहले दिले शाएर पे बयां होता है…..

    abodhbaalak के द्वारा
    December 30, 2010

    huzoor, mai to apne aapko ek abodh lekhak hi samjhta hoon, jo kalam chala leta hai (typing), ek lekhak to bilkul nahi maanta, waise Malik Moammad Jaisi bhi Insaan hi they na?agar mai manch par unko dhoondo to kya….? Ahan! aapne to ek sher bhi maar dia….. ab meri shayri to aisi hai ki kisi ko sunao to wo …….. is liye iska jawab mere bas ki baat nahi hai bas 2 line tukbandi ki ” raaz ki bat wo bas jaane hai kaash mai unka raajdaa(n) hota” Adaab arz hai —>kindly dont take anything personally…


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