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बालश्रम से मुक्ति दो

Posted On: 24 Dec, 2010 Others में

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इतना कठोर निर्दयी न बन
पुष्प सामान कोमल हैं हम
पुण्य कर पापी न बन
टूट के फिर न जुड़ेगे हम
उपवन सा प्यारा सा मन
धरती सा पावन सा मन
इसको दुःख जब होता है
भविष्य मंथन में खोता है
घमण्ड नहीं है गर्व है मुझको
भविष्य तुम्हारा कहलाऊं
प्रत्येक पथ पर स्वर्ण मिले
ऐसा कुछ मैं कर जाऊं
परिश्रम से न पीछे हम
पर शोषण से डरता मन
मानवता का सागर बन
प्यार के भूखे पुष्प है हम
भविष्य खडा बांहें फैलाए
क्यूँ न कुछ बन जाएं हम
इतना कठोर निर्दयी न बन
पुष्प सामान कोमल हैं हम

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Deepak Sahu के द्वारा
January 16, 2011

बहुत ही सुन्दर भावनाओं की अभिव्यक्ति! सुन्दर रचना! दानिश जी बधाई! दीपक! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

Syeds के द्वारा
December 24, 2010

दानिश जी, मंच पर आपका स्वागत है,सन्देश देती बेहद सुन्दर रचना …. http://syeds.jagranjunction.com

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 24, 2010

खूबसूरत लेख बधाई………..

nishamittal के द्वारा
December 24, 2010

बहुत अच्छा लिखा है बच्चों के शोषण पर.आप इस सन्दर्भ में मेरा लेख “बचपन के दिन हैं उम्र खेलने की “पढ़ सकते हैं.प्रथम पोस्ट पर बधाई.

opin के द्वारा
December 24, 2010

is tkere any special place to give.

    danishmasood के द्वारा
    December 25, 2010

    thanks


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